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मन की बात (133वां एपिसोड) – विस्तृत भाषण (सरल एवं स्पष्ट रूप में) live

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।

आज एक बार फिर ‘मन की बात’ के माध्यम से आपसे जुड़कर मुझे बहुत खुशी हो रही है। इन दिनों देश के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ रही है और मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और बदलते मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या में आवश्यक सावधानी बरतें।

साथियो,

हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत हमारे देशवासियों की जागरूकता और सहभागिता है। जब जनभागीदारी बढ़ती है, तो बड़े से बड़े लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं। आज देश के कोने-कोने में लोग छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े परिवर्तन ला रहे हैं।

आज मैं आपसे प्रकृति, पर्यावरण और हमारे लोकल संसाधनों से जुड़े कुछ प्रेरणादायक विषयों पर चर्चा करना चाहता हूँ।

साथियो,

आज भारत में बांस (Bamboo) को लेकर एक नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। बांस को ‘ग्रीन गोल्ड’ कहा जाता है। यह न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। देश के कई हिस्सों में हमारे किसान और युवा बांस से जुड़े नए-नए उत्पाद बना रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

बांस से फर्नीचर, हस्तशिल्प और दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं बनाई जा रही हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिल रहा है। मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को अपनाते हुए ऐसे उत्पादों का उपयोग करें।

साथियो,

प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। जल, जंगल और जमीन का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि हम छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, जैसे पानी की बचत, पेड़ लगाना और स्वच्छता बनाए रखना, तो हम पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं।

इसी संदर्भ में मैं आपको गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों की याद दिलाना चाहता हूँ। उन्होंने शिक्षा और जीवन को प्रकृति के साथ जोड़कर देखा। उनका मानना था कि मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य होना बहुत आवश्यक है।

आज भी टैगोर जी के विचार हमें प्रेरित करते हैं कि हम प्रकृति का सम्मान करें और उसके साथ संतुलित जीवन जिएं।

साथियो,

देश के कई हिस्सों में लोग बांस और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से न केवल अपनी आजीविका सुधार रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं। ये प्रयास हमें प्रेरित करते हैं कि हम भी अपने स्तर पर कुछ सकारात्मक कदम उठाएं।

हमारे देश की संस्कृति हमें सिखाती है कि प्रकृति का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। आज जरूरत है कि हम आधुनिकता के साथ-साथ अपनी परंपराओं को भी साथ लेकर चलें।

अंत में, मैं आप सभी से यही कहना चाहता हूँ कि हम सब मिलकर छोटे-छोटे प्रयास करें और देश के विकास में अपना योगदान दें। ‘सबका प्रयास’ ही ‘विकसित भारत’ की सबसे बड़ी ताकत है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी

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