Homeक्राइमशर्मनाक: पेशाब वाली थाली में मासूम को खिलाया खाना, जांच में दोषी...

शर्मनाक: पेशाब वाली थाली में मासूम को खिलाया खाना, जांच में दोषी पाए जाने पर भी ‘हैवान’ हेडमास्टर पर मेहरबानी क्यों?

बलरामपुर-रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाली एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। कुसमी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत नवाडीह कला (बरवाही पारा) के प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रधानपाठक अशोक कुमार गुप्ता पर मासूम बच्चों के साथ अमानवीय क्रूरता की सारी हदें पार करने का आरोप लगा है।
​क्रूरता की कहानी: जिसे सुनकर रूह कांप जाए:
​शिक्षा विभाग की जांच और ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत ‘पंचनामा’ में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
​अमानवीय दंड: छात्र नितेश पैंकरा को सजा के तौर पर कथित रूप से पेशाब वाली थाली (प्लेट) में जबरन खाना खिलाया गया।
​शारीरिक प्रताड़ना: छात्र राजधन को जूता पहने लात से बुरी तरह पीटा गया। वहीं, मासूम छात्रा आरोही गुप्ता के सिर पर सिर्फ इसलिए पानी उड़ेल दिया गया क्योंकि बोतल से पानी पीते वक्त थोड़ा पानी जमीन पर गिर गया था।


​अभद्र व्यवहार: छात्राओं के साथ गंदी भाषा का प्रयोग और छोटी-छोटी बातों पर बेरहमी से मारपीट करना शिक्षक की दिनचर्या बन चुकी है।
​जांच में दोष सिद्ध, फिर भी कार्रवाई सिफर:
​हैरानी की बात यह है कि इस मामले में 27 मार्च 2026 को विभागीय जांच हुई और फिर 10 अप्रैल 2026 को बीईओ (BEO) मनोज गुप्ता ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की। दोनों ही जांचों में आरोप सही पाए गए। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने निलंबन का आश्वासन तो दिया, लेकिन हफ़्तों बीत जाने के बाद भी ‘हैवान’ प्रधानपाठक शान से अपनी कुर्सी पर बैठा है।


​”डीईओ साहब कहते हैं कि राजनीतिक संरक्षण की वजह से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आखिर एक अपराधी शिक्षक के आगे प्रशासन इतना लाचार क्यों है?”
— संतोष गुप्ता (पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष एवं भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला सोशल मीडिया प्रभारी)


पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
​परिजनों ने चांदो थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है। यह मामला सीधे तौर पर किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) की धारा 75 और IPC की धारा 323, 504, 506 के तहत दंडनीय अपराध है। साथ ही आरक्षित वर्ग के बच्चों के साथ हुए इस व्यवहार पर SC/ST एक्ट के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
कलेक्टर की चौखट पर ग्रामीण
​सिस्टम की सुस्ती और आरोपी शिक्षक की ‘ऊंची पहुंच’ से तंग आकर अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है:
​आरोपी शिक्षक अशोक कुमार गुप्ता को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
​संबंधित थाने को निर्देशित कर शिक्षक के विरुद्ध आपराधिक मामला (FIR) दर्ज हो।
​बच्चों को मानसिक प्रताड़ना से उबारने के लिए स्कूल में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित हो।
​निष्कर्ष: एक तरफ प्रदेश सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे शिक्षक मासूमों का बचपन कुचल रहे हैं। आखिर किसकी शह पर इस ‘हैवान’ शिक्षक को बचाया जा रहा है? यह सवाल अब बलरामपुर प्रशासन के गले की फांस बन चुका है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

error: Content is protected !!