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प्रशासन की सजगता से रुकवाया गया बाल विवाह सुरक्षित हुआ 2 नाबालिकों का भविष्यबलरामपुर,

30 अप्रैल 2026/ बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर नियंत्रण के लिए जिले में जिला प्रशासन द्वारा सतत एवं सजग प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विकासखंड रामचन्द्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत ब्राहनगर एवं विकासखण्ड शंकरगढ़ के ग्राम पटासी में प्रशासन की तत्परता और समन्वित प्रयास से 2 नाबालिकों का बाल विवाह रुकवाया गया। जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत ब्राहनगर में एक नाबालिग बालक एवं ग्राम पटासी में नाबालिग बालिका का विवाह तय किया गया था। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, चाईल्ड हेल्पलाइन बलरामपुर तथा पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित स्थल पर पहुंचकर जांच की जिसमें बालक एवं बालिका की आयु, विवाह के लिए निर्धारित आयु से कम पायी गई। टीम ने मौके पर परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि विवाह हेतु लड़के का उम्र 21 वर्ष तथा लड़की की उम्र 18 वर्ष निर्धारित है। परिजनों को बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है, बाल विवाह कराने या उसमें सहयोग करने पर कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाइश दी गई। इससे बालक-बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कम उम्र में विवाह होने से बालक एवं बालिकाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अल्प आयु में मातृत्व से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं। समझाइश पर परिजनों ने अपने बच्चों की सही आयु में विवाह करने की बात कही। इस दौरान ग्रामवासियों से भी अपील की गई कि वे अपने आसपास इस प्रकार की किसी भी घटना की जानकारी तुरंत प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें या जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मोबाईल नंबर 9826278915 पर संपर्क कर सकते हैं, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
गौरतलब है कि जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इसके लिए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्राम सभाओं एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों एवं कानून की जानकारी दी जा रही है। साथ ही समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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