
परिजनों ने लगाई जाँच की गुहार जानना चाहते है मौत का कारण , डाक्टरों ने बिना पीएम के थमा दिया शव,
न्यूज़ दर्शन@चांदो/बलरामपुर। 21 अप्रैल। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधा आम नागरिकों सहित सभी वर्गों को उपलब्ध कराने कई अभियान चला रही हैं. पर ग्रामीण इलाकों में इसका कोई असर नहीं पड़ता. भले ही लोगो की जान जोखिम में आ जाए. पर उसके बाद भी डिजिटल भरे इस दौर में भी एक आदिवासी महिला के मौत के बाद लापरवाही को छुपाने हर संभव प्रयास किया जा रहा हैं.
मामला बलरामपुर जिला के महज 30 किलोमीटर पर स्थित ग्राम पंचायत चांदो का हैं. यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ “आरएमए” ने अपने निजी क्लिनिक में ब्लड प्रेशर चेक कराने पहुंची आदिवासी महिला को नस में इंजेक्शन लगाया. इसके तुरंत बाद उक्त महिला की मौत हो गई. विश्वस्थ सूत्रों के अनुसार जानकारी सामने आई हैं की निजी क्लिनिक में उक्त महिला ईलाज कराने संविधान के निर्माता डॉ.भीम राव अम्बेडकर जयंती पर चांदो का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद होने के कारण गई थी। ग्रामीणों ने बताया है की आरएमए अपने रूम पर निजी क्लीनिक में फिस लेकर ईलाज करते हैं।

उल्लेखनिय हैं की आदिवासी महिला सीमा किस्पोट्टा की मौत का मामला तब सामने आया जब उक्त मृतिका के भाई डेविड किस्पोट्टा ने चांदो तहसीलदार के समक्ष उपस्थित होकर आवेदन प्रेषित किया और जांच उपरांत न्याय की गुहार लगाई. आवेदक ने दिए गए आवेदन में बताया कि दिनांक 14 अप्रैल 2025 दिन सोमवार सुबह महुआ चुनने के बाद चान्दो साप्ताहिक बाजार करने मेरी बहन सीमा किस्पोट्टा उम्र 41 वर्ष जाति उरांव गांव जरहाखाड़ ग्राम पंचायत मगाजी के कुछ लोगों के साथ बाजार गई थी। बाजार पहुंचने के बाद गांव वालों से बोली कि मैं अस्पताल बीपी चेक करावाने जा रही हूँ।
अम्बेडकर जयंती पर बंद था स्वास्थ्य केंद्र, लापरवाही छुपाने मौत के बाद आरएमओ ने शव किया रेफर..
आगे आवेदन ने बताया गया की सीमा किस्पोट्टा जब अस्पताल पहुंची तो देखी 14 अप्रैल अम्बेडकर जयंती के कारण अपस्ताल बंद था. अस्पताल के पीछे आरएमए उमा शंकर वर्मा अपने रूप में ईलाज कर रहे थे. वहां भीड़-भाड़ था. तभी मेरी बहन आरएमए को बोली की मेरा बीपी चेक कर दीजिए. मुझे चक्कर चक्कर सा लग रहा है। तभी उमाशंकर वर्मा नस में इन्जेक्शन लगाया. और कुछ ही सकेण्ड में मेरी बहन जमीन पर गिर गई और उल्टी होने लगा. उसके बाद आरएमए अन्य लोगों के सहयोग से अस्पताल के पीछे से अस्पताल के अन्दर ले जाकर बोतल पानी चढ़ाने लगा और साथ ही बलरामपुर जिला अस्पताल के लिए पर्ची बनाया और कहा कि तुरन्त इसको बलरामपुर ले जावे, बोलो तो मैं अपना गाड़ी में पहुंचा देता हूँ, जिसके बाद दमाद की गाड़ी से बलरामपुर लेकर गये, जहां जिला अस्पताल के डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। हम परिवार वालों का अरोप है कि आरएमओ उमाशंकर वर्मा के गलत ईलाज से मेरी बहन की मौत हो गई, मेरी बहन का पोस्ट मार्डम तक नहीं हुआ, जिससे हमलोगों का शक और गहरा गया है. मेरी बहन के चार बेटी जिसमें से तीन बेटी पढ़ाई कर रही है. मेरी बहन की मौत से बेटियों का भविष्य खतरे में है. असमायिक मृत्यु से परिवार के लोग कॉफी दुःखी है। मामले का जाँच निष्पक्ष करने की कृपा करें ताकि परिवार वालों को न्याय मिल सके।
मौत के बाद उठ रहे सवाल..
मौत की इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं की आरएमओ के इंजेक्शन लगाने पश्चात ही उक्त महिला की मौत हो गई थी और मृत अवस्था में लापरवाही को छुपाने जिला अस्पताल बलरामपुर रेफर “बॉलीवुड़” फिल्म के तर्ज पर किया गया था. ताकि निजी क्लीनिक में मौत होने की जानकारी को छुपाई जा सके. और मौत जिला अस्पताल में होना साबित हो सके. परिजनों ने मौत के बाद डॉक्टर के द्वारा शव का पोस्टमार्टम नहीं किए जाने का गंभीर आरोप लगाया हैं. पूरा मामला जाँच का विषय हैं।
बिना डॉक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन..
अप्रैल माह 2025 से यहां पदस्थ किए गए प्रशिक्षु एमबीबीएस डॉक्टर मयंक त्यागी स्वास्थ्य केंद्र नहीं आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि डॉ. त्यागी करीब छः माह सेवा देने के बाद बलरामपुर जिला में जा चुके हैं. इसके पूर्व भी डॉक्टरों की कमी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चांदो में लगातार रही है. तथा यहां पदस्थ किए गए आरएमए (रजिस्टर्ड मेडिकल अस्सिटेंस) के भरोसे चांदो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन छोड़ दिया गया हैं।
प्रभारी मंत्री तक पूर्व में पहुंच चुकी हैं शिकायत..
चांदो के ग्रामीणों ने करीब एक वर्ष पूर्व उक्त आरएमए पर पैसा लेकर इलाज करने तथा सरकारी दवाइयां बेचने सहित कई आरोप लगातें हुवे जांच व कार्रवाई किए जाने की शिकायत महिला एवं विकास विभाग मंत्री तथा बलरामपुर की प्रभारी लक्ष्मी राजवाड़े से की गई थीं। प्रभारी मंत्री ने अपने कर्तव्यों का बखूबी पालन करते हुए इस पर जांच कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए. तथा इस पर जांच टीम गठित की गई और जांच के लिए पहुंची टीम के समक्ष लगे आरोप सच भी हुए लेकिन कार्यवाही शून्य रहने के कारण उक्त आरएमए की मनमानी चरम सीमा पर है। लंबे समय से एक ही स्थान पर रहने के कारण मनमानी पूर्वक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन करना, निजी रूम में क्लीनिक खोल इलाज करना अब पेशा बन चुका है. इसके एवज में आरएमए मोटी कमाई करने में जुटे हुए हैं।
किसने क्या कहा…
मामलें में चांदो तहसीलदार दानिश परवेज ने कहा शिकायत आई हैं जिला चिकित्सालय से जाँच टीम का गठन हुवा हैं।
थाना प्रभारी चांदो दुबेंन्द्र टेकाम ने कहा शिकायत नहीं आया हैं, आवेदन में प्रतिलिपि होने के सवाल पर कहा प्रतिलिपि हैं पर अभी तक कोई आया नहीं हैं। मैं बुलवाया था परिजनों को तो बोले हो गया सर नहीं कराएँगे अभी इसमें कुछ, जब तक पीएम नहीं आ पाएगा तब तक कुछ नहीं बता पाएंगे।
मामलें में आरएमए उमाशंकर शर्मा ने बताया अम्बेडकर जयंती सोमवार को छुट्टी का दिन था. मैं रूम में था. तभी वह महिला आई चक्कर व उल्टी लग रहा है बोली. जिसका बीपी चेक किया बीपी लो बताया. उल्टी का इंजेक्शन लगाने बोली तो मैं लगाया. उल्टी लग रहा है कह कर बाहर निकली और उल्टी करके गिर गई. इसके बाद उसे अस्पताल ले जाकर इंजेक्शन बोतल लगाया और उसको जिला अस्पताल रेफर किया. परिजनों को बताकर, परिजन आए और ले गए।
मामले में विकासखंड चिकित्सा अधिकारी कुसमी सतीश चंद्र पर ने कहा जांच टीम का गठन किया गया है। जिसमें रामानुजगंज के बीएमओ डॉक्टर मोहन कुमार गुप्ता,चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर श्रृष्टि कश्यप, बलरामपुर चिकित्सा अधिकारी डॉ अनूप पैकरा और बलरामपुर के सहायक ग्रेड 3 अजय कुशवाहा शामिल है जिनके द्वारा जांच रिपोर्ट तैयार किया गया है. जिला द्वारा जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामलें में बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा को कॉल किया गया किन्तु उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।
परिजनों पर बयान बदलने का दबाव
वहीं परिजनों का आरोप है की मामला सामने आने के बाद चांदो अस्पताल के प्रभारी आरएमए उमाशंकर वर्मा और अस्पताल के अन्य स्टाफ के द्वारा फोन एवं रात में घर जाकर जांच प्रभावित करने के उद्देश्य से बयान बदलने को कहा जा रहा है।



